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सूचना का अधिकार 2005 शुल्क

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  आज की इस पोस्ट में आपको सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत कराते है। यह जानकारी आम आदमी के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिससे व्यक्ति अपने अधिकार समझ सकता है। सूचना के अधिकार के लिये निर्धारित शुल्क 1. सूचना के अधिकार आवेदन ग्राह् किये जाने से पूर्व निर्धारित शुल्क लिया जाना आवश्यक है। 2. यदि लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार का आवेदन खारिज किया जाता है, तो आवेदन के साथ संलग्न शुल्क विधि अनुसार वापस किया जाना आवश्यक नही है। 3 एक आवेदन के साथ कितनी भी जानकारी चाही गई हो परन्तु शुल्क 10/- रूपये ही निर्धारित रहेगा। 4. सूचना के अधिकार आवेदन के लिये न्यायालय शुल्क के स्टाम्प मान्य नही है। 5. सूचना के अधिकार के लिये शुल्क नगद, बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। लेकिन वह डाक खर्च के लिये मान्य नही होगा, डाक खर्च का शुल्क आवेदक को अलग से प्रदाय करना होगा। 6. कंपनी अधिनियम के अंतर्गत अपीलार्थी निर्धारित शुल्क जमा कर पंजि का निरीक्षण करने हेतु स्वतंत्र है। 7. अपीलार्थी द्वारा अपील के प्रक्रम पर नई जानकारी चाही जाने पर उसके द्वारा न...

धारा 365 366 367 क्या है

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   भारतीय दण्ड संहिता की धारा 365 का अपराध आज आपको धारा 365 366 367 के बारे में बताएगे। कभी - कभी बहुत से माता-पिता की शिकायत आती हैं कि उनकी लड़की को, दामाद ने जबरदस्ती मायके से ले गया परन्तु दामाद उसकी पत्नी को, पत्नी के सुसराल न ले जाकर कही और छिपा कर रखे और लड़की को उनके माता-पिता से न मिलने दे तो क्या दामाद पर लड़की के माता-पिता धारा 365 के अंतर्गत मामला दर्ज कर सकते हैं? जानिए धारा 365 क्या है? अगर कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति  का बलपूर्वक अपहरण या व्यपहरण करके व्यक्ति को किसी गुप्त स्थान पर छिपा कर रखता है तब ऐसा करने वाला व्यक्ति धारा 365 के अंतर्गत दोषी होगा। अब आप समझ गए होगे धारा 365 क्या है।  भारतीय दण्ड संहिता  की धारा 365 के अंतर्गत दण्ड      इस धारा के अपराध किसी भी तरह से समझौता योग्य नहीं होते है।यह अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते हैं। धारा 365 के विचारण का अधिकार पहले प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को था बाद में सरकार ने इसमें संशोधन करके इसके विचारण का अधिकार सत्र न्यायाधीश को दे दिया गया है।  सजा- उपयुक्त अपराध के लिए 7 वर...

कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम क्यों खिलाते थे, रामायण पर क्यों नहीं है |

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  कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम क्यों खिलाते थे, रामायण पर क्यों नहीं है | भगवान श्रीराम ने जीवन में कभी झूठ का सहारा नहीं लिया। उनका जीवन एक आदर्श जीवन था जबकि भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध में विजय के लिए ' पूर्व से स्थापित आदर्श' का अनिवार्य पालन नहीं किया बल्कि विजय की प्राप्ति के लिए पूर्व निर्धारित आदर्शों का उल्लंघन किया। फिर क्या कारण है कि कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम खिलाते थे रामायण पर नहीं। भारत में गीता पर हाथ रखकर कसम खाने की परंपरा कब शुरू हुई         प्रख्यात पत्रकार श्री हेमंत सिंह की एक स्टडी के अनुसार भारत में मुगल शासकों ने धार्मिक किताबों पर हाथ रखकर शपथ लेने की प्रथा शुरू की थी। क्योंकि मुगल शासक अपने लाभ के लिए झूठ बोलते थे, छल-कपट करते थे, इसलिए भारत के नागरिकों के वचन पर विश्वास नहीं करते थे लेकिन वह इस बात पर विश्वास करते थे कि भारत के नागरिक अपने धर्म ग्रंथ पर हाथ रखकर यदि शपथ उठा ले तो फिर झूठ नहीं बोलते। शायद उन्हें भारत में सत्य वचन के लिए 'गंगाजल' परंपरा का ज्ञान था।  कोर्ट में धार्मिक पुस्तक पर हाथ रख कर शपथ लेने का...

हत्या के लिए किडनैपिंग का केस किस धारा में दर्ज होगा

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       हत्या के लिए किडनैपिंग का केस किस धारा के तहत दर्ज किया जाएगा किडनैपिंग कई प्रकार की होती है। किसी व्यक्ति को कुछ देर तक निष्क्रिय करने के लिए। फिरौती या फिर किसी अन्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए और हत्या करने के लिए। भारतीय दंड संहिता में धाराओं का निर्धारण अपराध के उद्देश्य पर निर्भर करता है। इसलिए किडनैपिंग की धाराओं का निर्धारण भी उसके उद्देश्य पर किया जाता है। आज हम आईपीसी से पूछते हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी की हत्या करने के उद्देश्य से उसे किडनैप कर लेता है तो उसके खिलाफ किस धारा के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही यदि वह अपरहण करने के बाद हत्या करने में सफल हो जाता है तो उसके खिलाफ अपहरण की धारा लगेगी या सिर्फ हत्या का केस दर्ज होगा। भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 364 के तहत अगर किसी व्यक्ति का अपहरण या व्यपहरण करने का उद्देश्य हत्या करना मात्र है तो वह व्यक्ति धारा 364 के अंतर्गत दोषी होगा। 2. अगर आरोपी हत्या कर देता है तो धारा 302 (हत्या) के अपराध के साथ 364 के अपराध का भी दोषी होगा धारा  के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:- इस धारा के ...

पॉल्यूशन सर्टिफिकेट क्या है

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   अगर आपके पास अपनी गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है और आपको यह चिंता है कि ऐसे में आपका इंश्योरेंस क्लेम रद्द हो जाएगा, तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवपलमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने इस बात को लेकर यह साफ किया है कि पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं होने पर मोटर इंश्योरेंस पॉलिस के तहत किसी भी क्लेम को रद्द नहीं किया जाएगा. इसलिए मोटर इंश्योरेंस धारकों के लिए चिंता करने की कोई बात नहीं है. इरडा के सर्रकुलर के बाद हुई थी दुविधा दरअसल, इरडा ने 20 अगस्त को जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के CEO/ CMD को एक चिट्ठी भेजकर कहा था कि वाहन के इंश्योरेंस के रिन्युअल के समय वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट को प्रस्तुत करने को सुनिश्चित करें. इसमें उसने अपने 6 जुलाई 2018 के सर्रकुलर का हवाला दिया जिसमें एम सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करने को कहा था. इसके बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि PUC सर्टिफिकेट मौजूद नहीं होने पर रिन्युअल के आवेदन को रद्द किया जा सकता है जिससे क्लेम रिक्वेस्ट भी रद्द हो सकती है. ...

SPEED गाड़ी की नहीं सड़क की FIX होती है, तेज चलाई तो चालान नहीं जेल वारंट बनता है, नियम पढ़ लीजिए

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लोग अपने वाहन की स्पीड इस बात पर फिक्स करते हैं कि सड़क कैसी है, उस पर यातायात कितना है और वाहन की अधिकतम स्पीड कितनी है लेकिन वह नहीं जानते कि इस तरह वह आईपीसी की धारा 279 का उल्लंघन कर रहे हैं। इस धारा का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस चालान नहीं बनाती बल्कि 6 माह की जेल की सजा दी जाती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आईपीसी की धारा 279 के अनुसार स्पीड आपके वाहन में कि नहीं होती बल्कि सड़क की निर्धारित होती है। नेशनल हाईवे और शहर की सड़क पर सामान्य स्पीड में वाहन नहीं चलाया जा सकता भले ही आपके वाहन में कितनी भी स्पीड से चलने की क्षमता हो। कुछ सड़कों के किनारे लिखा भी होता है 'अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा'। आईपीसी 1860 की धारा 279 की परिभाषा:- कोई व्यक्ति जानबूझकर या जल्दबाजी में निम्न कृत्य करेगा:- 1. कोई भी वाहन को सार्वजनिक सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग पर पर उतावलेपन या लापरवाही से तेज रफ्तार से कोई भी वाहन चलाएगा। 2. कोई भी वाहन से तात्पर्य है - बस, ट्रक, बाइक, ट्रेक्टर आदि सड़क पर चलने वाले वाहन। 3. तेजरफ्तार से चलने वाले वाहन से जन-जीवन को खतरा होने की संभ...

Covid 19 से बचाव हेतु धारा 144 सीआरपीसी क्या है

सीआरपीसी धारा 144 शांति कायम करने या किसी भी स्थिति से बचने के लिए लगाई जाती है। किसी भी तरह की सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी खतरे या दंगे की आशंका हो। धारा -144 जहाँ लगती है, उस क्षेत्र में पाँच या उससे अधिक आदमी एक साथ जमा नहीं हो सकते हैं। धारा लागू करने के लिए इलाके के जिलाधिकारी द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है।  होता है। धारा -144 को 2 महीने से ज्यादा समय तक लागू नहीं किया जा सकता है। अगर राज्य सरकार को लगता है कि इंसानी जीवन को खतरा टालने या फिर किसी दंगे को टालने के लिए इसकी जरूरत है तो इसकी अवधि को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इस स्थिति में भी धारा -144 लगने की पत्रों की तारीख से छह महीने से ज्यादा समय तक लागू नहीं किया जा सकता है। सजा का प्रावधान गैर कानूनी तरीके से जमा होने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंगे में शामिल होने के लिए मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए अधिकतम तीन साल कैद की सजा हो सकती है। धारा -144 और कर्फ्यू के बीच ध्यान रहे कि से 144 और कर्फ्यू एक बात नहीं है। कर्फ्यू बहुत ही खराब स्थिति में लगाया जाता है। उस स्थिति में लोगों को एक विशेष समय या अवधि तक अप...

साइबर स्टॉकिंग क्या है

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साइबरस्टॉकिंग इंटरनेट या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग किसी व्यक्ति, समूह या संगठन को परेशान करने के लिए किया जाता है।  इसमें झूठे आरोप , मानहानि , बदनामी और  आ  सकते हैं । इसमें निगरानी, पहचान की चोरी , धमकियां, बर्बरता, सेक्स के लिए याचना, या ऐसी जानकारी एकत्र करना शामिल हो सकती है जिसका उपयोग करने, शर्मिंदगी या उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है।                                             साइबरस्टॉकिंग अक्सर रियलिट्री या नर्सिंग स्टैकिंग के साथ होता है।    कई जोड़ियाँ में, जैसे कि माइकल, दोनों आपराधिक अपराध हैं।    दोनों में से किसी को को नियंत्रित करने, डराने या प्रभावित करने की इच्छा से प्रेरित होते हैं।   एक हंटर एक एनल अजनबी या ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जिसे कोई नहीं जानता हो।     साइबर स्टैकिंग विभिन्न राज्य विरोधी,   बदनामी और उत्पीड़न कानूनों के तहत एक आपराधिक अपराध है । एक दोषी को जेल सहित साथी के खिलाफ निरोधात्...

Ram Mandir judgements / ayodhya verdicts

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Ram Mandir judgement . Click the link down सिविल अपील एनओएस 10866-10867 2010 के एम सिद्दीक (डी) थ्रस्ट लार्स बनाम। महंत सुरेश दास और ओआरएस। https://www.sci.gov.in top  lawyer :-    shri dharmendra singh Bhadouriya ,Shri Akhilesh Singh Bhadoriya, shri ajay singh bhadoriya

Section 498-A IPC

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Section 498 IPC   Whoever knows, or has reason to believe, any married woman, who is the wife of another man, and who is the wife of another man, from that man, or from someone who is  Carries that woman on behalf of the man, luring or hiding with the intention that the woman should have illegal sexual intercourse with another person, then she should be given a car for a period  Habitat that can be extended up to two years, or will be punished by a fine, or both.  Punishment - two years imprisonment or pecuniary punishment or both.  It is a bailable, non-cognizable offense and is negotiable by any magistrate.  This crime is negotiable by the victim's husband and wife. Section 498-A IPC            Someone, being a husband or husband relative of a woman, will be cruel to such a woman, she will be punished with imprisonment, which can be up to three years and punishable with fine.  Explanat...

Rule and procedure for taking a personal loan

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  Rules and procedure for taking a personal loan        If you need money for short term, then one of the easiest ways is personal loan. People often hesitate to take a loan due to lack of complete knowledge about personal loan, whereas through this we can take care of all our personal needs.  can complete.  Banks and various financial institutions provide the facility of personal loan at a fixed rate of interest i.e. personal loan for any need ranging from roaming, shopping, jewelery, starting a business, filling credit card money.  Can be obtained.  Let us tell you that a minimum amount of Rs 50,000 to Rs 50,0000 can be obtained as a personal loan.  Things should be kept in mind while taking a personal loan, today we will tell you.   Better understand rules and procedures  First of all, make you aware that almost all banks in India offer personal loans.  Each bank has different rules and procedures ...

पर्सनल लोन लेने के नियम ओर प्रक्रिया

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पर्सनल लोन लेने के नियम ओर प्रक्रिया              शॉर्ट टर्म के लिए अगर पैसे की जरूरत पड़ जाए तो सबसे आसान तरीकों में से एक है पर्सनल लोन अक्सर लोग पर्सनल लोन के बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण लोन लेने से हिचकिचाते हैं, जबकि इसके ज़रिए हम अपनी हर तरह की पर्सनल ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। बैंकों व विभिन्न वित्तीय संस्थाओं  द्वारा निश्‍चित ब्याज़ दर  पर पर्सनल लोन की सुविधा प्रदान की जाती है यानी घूमने जाने से लेकर, ख़रीदारी, ज्वेलरी, बिज़नेस शुरू करने, क्रेडिट कार्ड (credit card) का पैसा भरने तक की किसी भी ज़रूरत के लिए पर्सनल लोन प्राप्त किया जा सकता है। आपको बता दें कि पर्सनल लोन के रूप में न्यूनतम 50,000 रुपए से लेकर अधिकतम 50,0000 रुपए तक की रकम प्राप्त की जा सकती है। पर्सनल लोन लेने वक्‍त क‍िन बातों का ध्‍यान रखना चाह‍िए, आज हम आपको बतायेंगे। न‍ियम और प्रोसीजर को अच्‍छे से समझ लें सबसे पहले आपको इस बात से अवगत करा दें कि भारत के लगभग सभी बैंक  पर्सनल लोन देते हैं। लोन देने के हर बैंक के अलग-अलग नियम और प्रोसीजर हैं। आ...

Motor vehicle insurance law of india

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vehicle insurance law  in india  is governed by the   insurance act  and aspects of insurance contracts governed by the indian contract act , transfer of property Act  and a few others. Vihical insurance  is the insurance coverage of the risk of third party arising out the use of motor vehicle and also for covering the risk of damage caused to the vehicle. Taking insurance policy for coverage of certain risks are made compulsory and coverage for other risks are optional at the instance of the owner. Accordingly, motor vehicle insurance policies can be divided into two, namely, compulsory insurance policy (Act policy) and comprehensive policy. Vehicle insurance  (also known as  car insurance ,  motor insurance , or  auto insurance ) is insurance  for car motarcycal  lmao and other road vehicles. Its primary use is to provide financial protection against physical damage or bodily injury ...

According to the Ministry of Passport, revised rules for making passports

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According to the Ministry of Passport, revised rules for making passports  The Ministry of External Affairs of the Government of India has issued several new rules on Friday to ease the process of making passports.  Now passports of saints and saints, children born outside marriage and children of single parents, orphans will also be made easily.  Also, it will not be mandatory to give the names of both the parents for the passport application.  What changed  1. Earlier, people born after 26/01/1989 had to give separate birth certificate.  Now for the date of birth, the school's TC, date of birth written on PAN card, date of birth written on Aadhar card, driving license, voter ID card, insurance policy will also be valid.  2. Now in the passport application, it will be mandatory to give the name of any one of the parents or the name of the legal guardian.  With this, single parents can now easily apply for passports f...

पासपोर्ट मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट बनवाने के संशोधित नियम

पासपोर्ट मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट बनवाने के संशोधित नियम                 भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को आसान करने के लिए शुक्रवार को कई नए नियम जारी किए हैं. अब साधु-संन्यासी, विवाह के बाहर पैदा हुए बच्चे और सिंगल पेरेंट्स के बच्चों, अनाथ बच्चों का पासपोर्ट भी आसानी से बन सकेगा. साथ ही माता-पिता दोनों का नाम पासपोर्ट आवेदन के लिए देना अनिवार्य नहीं होगा. क्या बदला ? 1. पहले 26/01/1989 के बाद जन्मे लोगों को अलग से जन्म प्रमाण पत्र देना होता था. अब जन्मतिथि के लिए स्कूल की टीसी, पैन कार्ड पर लिखित जन्मतिथि, आधार कार्ड पर लिखी जन्मतिथि, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, बीमा पॉलिसी भी मान्य होंगे. 2. अब पासपोर्ट के आवेदन में माता-पिता में से किसी भी एक का नाम या क़ानूनी अभिभावक का नाम देना ही अनिवार्य होगा. इससे अब सिंगल पेरेंट भी अपने बच्चों के लिए पासपोर्ट का आवेदन आसानी से कर सकेंगे. आवेदनकर्ता की मांग पर अब पासपोर्ट पर माता-पिता में से किसी एक का ही नाम प्रकाशित किया जा सकेगा. 3. शादीशुदा ...