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दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार | बंटवारे के नियम और कानूनी हक़। Property

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  दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार | बंटवारे के नियम और कानूनी हक़ दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति पैतृक है या स्व-अर्जित, और उनके माता-पिता जीवित हैं या नहीं। अगर संपत्ति पैतृक है, तो पोता पोती को जन्म से ही अपने पिता के हिस्से के बराबर अधिकार मिलता है, लेकिन यह अधिकार तभी बनता है जब उनके पिता का निधन हो चुका हो। वहीं, अगर संपत्ति दादा की खुद की खरीदी हुई (स्व-अर्जित) है, तो पोते पोतियों का उस पर कोई सीधा कानूनी हक नहीं होता। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दादा की प्रॉपर्टी में किसका कितना अधिकार है? पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है और अगर माता-पिता जीवित हैं तो क्या वे दादा की संपत्ति पर पोता पोती दावा कर सकते हैं या नहीं? दादा की संपत्ति के प्रकार और उसमे पोते पोती के अधिकार दादा की प्रॉपर्टी में पोते और पोती का अधिकार जन्म से हो होता है या पिता के माध्यम से मिलता है, यह पूरी तरह से संपत्ति प्रकार पर निर्भर करता है। यहाँ हम दादा की संपत्ति के दो मुख्य प्रकारों के बारे में बात करेंगे:  1. दादाजी की स्...

राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ

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राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ रकबा- क्षेत्रफल,  खसरा- भूमि क्रमांक,  पांचसाला- पिछले पांच' साल का खसरा चांदा- सीमा चिन्ह,  मुनारा- सर्वेक्षण चिन्ह,  उपकर - अबवाब (मुख्य कर का उपकर) मौसूली- वसूली प्राप्त करना,  नस्ती- खात्मा,  अलामत- छोटे-छोटे चिन्ह,  मसाहती ग्राम- जिसकी सीमा न हो मीजान- कुल,  सकूनत- निवास  वाजिब-उल-अर्ज- निजी जमीन में सार्वजनिक उपयोग दर्शाने वाला रिकार्ड गिरदावरी- खेतों व फसलों का निरीक्षण कर रिकार्ड करना,  तितम्मा मिलान- हल, बैल, कृषि यंत्र की गणना,  गोशवारा- महायोग,  रूढ़ अलामात- परंपरागत सीमा,  हलफनामा- शपथ पत्र,  बैनामा- विक्रय पत्र,  बयशुदा- खरीदी,  काबिज- कब्जा है,  दीगर- अन्य,  वारिसान- उत्तराधिकारी,  बख्शीश- उपहार या दान,  फौत - मौत,  रहन- गिरवी,  कैफियत- स्पष्टीकरण/विवरण  साकिन- निवासी मौजा बेचिराग - बिना आबादी का गांव फकुल रहन - गिरवी रखी भूमि को छुड़ा लेना तबादला - भूमि के बदले भूमि लेना बैय - जमीन बेच देना मुसन्ना - असल रिकॉर्...

BNS Section 105 in Hindi

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बीएनएस धारा 105 क्या है और यह कब लागू होती है -  भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 में गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) के अपराध को परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है जो कोई भी किसी व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या करता है। जो हत्या (Murder) के अपराध से अलग होती है, तो ऐसे अपराध को करने वाले व्यक्ति पर बीएनएस की धारा 105 के अंतर्गत कार्यवाही की जाती है। आइये गैर इरादतन हत्या को आसान भाषा में विस्तार से समझते है। जब भी कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है, जिसको करते समय उसे पता होता है कि उसके किए गए कार्य के द्वारा किसी व्यक्ति की जान जा सकती है, तो वह गैर इरादतन हत्या का अपराध कहलाता है। लेकिन यह हत्या के अपराध की धारा से अलग होता है, क्योंकि हत्या के अपराध में आरोपी का किसी व्यक्ति को जान से मारने का पहले से ही इरादा (Intention) होता है। उदाहरण:- जैसे कोई व्यक्ति लापरवाही से गाड़ी चलाता है और लापरवाही के कारण ही उसकी गाड़ी किसी को टक्कर मार देती है। जिसके बाद आरोपी व्यक्ति को पता होता है कि अब उस व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है या हो जाती है। तो वह गैर-इरादतन हत्या कहलाती है। गैर इरा...

डिजिटल अरेस्ट क्या है Digital Arrest:

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  डिजिटल अरेस्ट क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है? Digital Arrest:  डिजिटल अरेस्ट कैसे किया जाता है? पार्सल, गिफ्ट और वॉट्सएप कॉल पर असली सा दिखने वाला अधिकारी; क्‍या है पूरा खेल? What is Digital Arrest साइबर अपराधी नए-नए तरीके से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। साइबर ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फंसा कर उनको डराते-धमकाते हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग ड्रग्स व अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हैं।  उनकी मोटी कमाई लूट लेते हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है इस साइबर धोखाधड़ी से कैसे सुरक्षित रहें यहां पढ़िए...  डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। देश भर में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ता जा रहा है। इन दिनों साइबर ठग धोखाधड़ी के लिए डिजिटल अरेस्ट स्‍कैम कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट के जरिये करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंता जता चुके हैं। साथ ही इस तरह के स्कैम से सतर्क रहने के लिए देशवासियों को आगाह किया। क्‍या आप जानते हैं कि डिजिटल अरेस्ट क्या है? डिजिटल अरेस्ट की पहचान कैसे करें और इससे बचने के लिए...

पोक्सो केस मे सपोर्ट पर्सन

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  पोक्सो केस से पीड़ित व्यक्ति के लिए कानूनी प्रणाली सुगम बनाने हेतु सपोर्ट पर्सन का है प्रावधान एडीएम की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा पात्र पाए गए आवेदकों का किया जा चुका है साक्षात्कार शीघ्र सपोर्ट पर्सन का इम्पैनलमेंट तैयार किया जाएगा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार जिला अंतर्गत पोक्सो अधिनियम की धारा 39 के तहत पोक्सो केस से पीड़ित व्यक्ति के लिए कानूनी प्रणाली सुगम बनाने हेतु सपोर्ट पर्सन का प्रावधान है। सपोर्ट पर्सन से तात्पर्य है पोक्सो अधिनियम के तहत हर पीड़ित व्यक्ति के लिए सपोर्ट पर्सन नियुक्त किए जाने का प्रावधान है जिसके तहत सपोर्ट पर्सन का प्रमुख दायित्व पीड़ित बालक अथवा बालिका की गोपनीयता बनाए रखकर उनके लिए कानूनी प्रक्रिया सुगम बनाना है। न्यायालय में सुनवाई के दौरान सपोर्ट पर्सन की उपस्थिति में ही पीड़ित व्यक्ति से पूछताछ की जा सकेगी और सपोर्ट पर्सन का यह दायित्व होगा कि वह पीड़ित व्यक्ति को संचालित शासन के विभिन्न योजनाओं से सलग्न कर उसकी आवश्यकता अनुसार सहयोग प्रदान करें एवं योजनाओं के तहत संलग्न कर उसको लाभान्वित करने की कार्रवाई करें।  बाल संरक्षण अधिकारी...

दहेज निषेध अधिनियम 1961

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    दहेज़ निषेध अधिनियम https://youtu.be/gil5VmRUmZk दहेज़ निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2  जिसमें दहेज़ को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है:- “दहेज़” का अर्थ है प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर दी गयी कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सुरक्षा या उसे देने की सहमति”:- विवाह के एक पक्ष के द्वारा विवाह के दूसरे पक्ष को; या विवाह के किसी पक्ष के अभिभावकों द्वारा; या विवाह के किसी पक्ष के किसी व्यक्ति के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को; शादी के वक्त, या उससे पहले या उसके बाद कभी भी जो कि उपरोक्त पक्षों से संबंधित हो जिसमें मेहर की रकम सम्मिलित नहीं की जाती, अगर व्यक्ति पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) लागू होता हो। इस प्रकार दहेज़ से संबंधित तीन स्थितियां हैं- विवाह से पूर्व; विवाह के अवसर पर; विवाह के बाद; दहेज़ लेने और देने या दहेज लेने और देने के लिए उकसाने पर या तो 6 महीने का अधिकतम कारावास है या 5000 रूपये तक का जुर्माना अदा करना पड़ता है। वधु के माता-पिता या अभिभावकों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दहेज़ की मांग करने पर भी यही सजा दी जाती है। बाद में संशोधन अधिनियम के द्वारा इन सजाओं को भी ब...

SPEED गाड़ी की नहीं सड़क की FIX होती है, तेज चलाई तो चालान नहीं जेल वारंट बनता है, नियम पढ़ लीजिए

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लोग अपने वाहन की स्पीड इस बात पर फिक्स करते हैं कि सड़क कैसी है, उस पर यातायात कितना है और वाहन की अधिकतम स्पीड कितनी है लेकिन वह नहीं जानते कि इस तरह वह आईपीसी की धारा 279 का उल्लंघन कर रहे हैं। इस धारा का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस चालान नहीं बनाती बल्कि 6 माह की जेल की सजा दी जाती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आईपीसी की धारा 279 के अनुसार स्पीड आपके वाहन में कि नहीं होती बल्कि सड़क की निर्धारित होती है। नेशनल हाईवे और शहर की सड़क पर सामान्य स्पीड में वाहन नहीं चलाया जा सकता भले ही आपके वाहन में कितनी भी स्पीड से चलने की क्षमता हो। कुछ सड़कों के किनारे लिखा भी होता है 'अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा'। आईपीसी 1860 की धारा 279 की परिभाषा:- कोई व्यक्ति जानबूझकर या जल्दबाजी में निम्न कृत्य करेगा:- 1. कोई भी वाहन को सार्वजनिक सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग पर पर उतावलेपन या लापरवाही से तेज रफ्तार से कोई भी वाहन चलाएगा। 2. कोई भी वाहन से तात्पर्य है - बस, ट्रक, बाइक, ट्रेक्टर आदि सड़क पर चलने वाले वाहन। 3. तेजरफ्तार से चलने वाले वाहन से जन-जीवन को खतरा होने की संभ...

Covid 19 से बचाव हेतु धारा 144 सीआरपीसी क्या है

सीआरपीसी धारा 144 शांति कायम करने या किसी भी स्थिति से बचने के लिए लगाई जाती है। किसी भी तरह की सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी खतरे या दंगे की आशंका हो। धारा -144 जहाँ लगती है, उस क्षेत्र में पाँच या उससे अधिक आदमी एक साथ जमा नहीं हो सकते हैं। धारा लागू करने के लिए इलाके के जिलाधिकारी द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है।  होता है। धारा -144 को 2 महीने से ज्यादा समय तक लागू नहीं किया जा सकता है। अगर राज्य सरकार को लगता है कि इंसानी जीवन को खतरा टालने या फिर किसी दंगे को टालने के लिए इसकी जरूरत है तो इसकी अवधि को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इस स्थिति में भी धारा -144 लगने की पत्रों की तारीख से छह महीने से ज्यादा समय तक लागू नहीं किया जा सकता है। सजा का प्रावधान गैर कानूनी तरीके से जमा होने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंगे में शामिल होने के लिए मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए अधिकतम तीन साल कैद की सजा हो सकती है। धारा -144 और कर्फ्यू के बीच ध्यान रहे कि से 144 और कर्फ्यू एक बात नहीं है। कर्फ्यू बहुत ही खराब स्थिति में लगाया जाता है। उस स्थिति में लोगों को एक विशेष समय या अवधि तक अप...

साइबर स्टॉकिंग क्या है

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साइबरस्टॉकिंग इंटरनेट या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग किसी व्यक्ति, समूह या संगठन को परेशान करने के लिए किया जाता है।  इसमें झूठे आरोप , मानहानि , बदनामी और  आ  सकते हैं । इसमें निगरानी, पहचान की चोरी , धमकियां, बर्बरता, सेक्स के लिए याचना, या ऐसी जानकारी एकत्र करना शामिल हो सकती है जिसका उपयोग करने, शर्मिंदगी या उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है।                                             साइबरस्टॉकिंग अक्सर रियलिट्री या नर्सिंग स्टैकिंग के साथ होता है।    कई जोड़ियाँ में, जैसे कि माइकल, दोनों आपराधिक अपराध हैं।    दोनों में से किसी को को नियंत्रित करने, डराने या प्रभावित करने की इच्छा से प्रेरित होते हैं।   एक हंटर एक एनल अजनबी या ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जिसे कोई नहीं जानता हो।     साइबर स्टैकिंग विभिन्न राज्य विरोधी,   बदनामी और उत्पीड़न कानूनों के तहत एक आपराधिक अपराध है । एक दोषी को जेल सहित साथी के खिलाफ निरोधात्...

Rule and procedure for taking a personal loan

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  Rules and procedure for taking a personal loan        If you need money for short term, then one of the easiest ways is personal loan. People often hesitate to take a loan due to lack of complete knowledge about personal loan, whereas through this we can take care of all our personal needs.  can complete.  Banks and various financial institutions provide the facility of personal loan at a fixed rate of interest i.e. personal loan for any need ranging from roaming, shopping, jewelery, starting a business, filling credit card money.  Can be obtained.  Let us tell you that a minimum amount of Rs 50,000 to Rs 50,0000 can be obtained as a personal loan.  Things should be kept in mind while taking a personal loan, today we will tell you.   Better understand rules and procedures  First of all, make you aware that almost all banks in India offer personal loans.  Each bank has different rules and procedures ...

Health insurance act in india

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                      Health insurance in India   is a growing segment of  india economy . In 2011, 3.9%of India's     was spent in the  health sector . According to the     WHO this is among the lowest of the     Brazil, Russia, India, China, South Africa economies. Policies are available that offer both individual and family cover. Out of this 3.9%, health insurance accounts for 5-10% of expenditure, employers account for around 9% while personal expenditure amounts to an astounding 82%.In the year 2016, thensso   released the report “Key Indicators of Social Consumption in India: Health” based on its 71st round of surveys. The survey carried out in the year 2014 found out that, more than 80% of Indians are not covered under any health insurance plan, and only 18% (government funded 12%) of the urban population and 14% (government funded 13%) of the rural populati...