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महिलाओ का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन(निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013

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                    (विशाखा समिति) महिलाओ का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन(निवारण,              प्रतिषेध और   प्रतितोष) अधिनियम 2013  1. जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन हुआ, वह शिकायत कर सकती है जहॉ व्यथित महिला अपनी शारीरिक या मानसिक असमर्थता या मृत्यु के कारण या अन्यथा शिकायत करने में असमर्थ है वहॉ उसका विधिक वारिस या ऐसा अन्य व्यक्ति जो विहित किया जाए इस धारा 9 के अधीन परिवाद करेगा। 2. शिकायत घटना से 3 महीने के अंदर होना चाहिए। 3. शिकायत करने की सीमा  तीन महीने तक बढाई जा सकती है। यदि शिकायत समिति को लगता है कि पीडिता शिकायत करने में असमर्थ थी। 4. शिकायत लिखित रूप में की जाना चाहिये। 5. धारा 10 सुलह आंतरिक समिति धारा 11 के अधीन जांच आरंभ करने से पूर्व और व्यथित महिला के अनुरोध पर शिकायत को यदि महिला चाहती है तो समझौते के आधार पर निपटाया जा सकता है। परंतु कोई धन लाभ के आधार पर समझौता नही किया जा सकता।  6 आंतरिक समिति अभिलिखित किए गए समझौते की प्रति...

भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 मे सजा और जमानत

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भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 मे सजा और जमानत किसी व्यक्ति के जीवन को खतरे में लाने वाले आपराधिक कार्यों के लिए पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 336 व 338 के तहत सजा की कार्यवाही की जाती थी। जिसे BNS के लागू किए जाने के बाद से भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 से बदल दिया गया है। इसलिए कानूनी छात्रों, पुलिस अधिकारी व देश के सभी नागरिकों के लिए इस कानून के बारे में जानना बहुत ही जरुरी है। बीएनएस की धारा 125 क्या है  भारतीय न्याय संहिता  की धारा 125 में किसी व्यक्ति की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में डालने वाले कार्यों को अपराध माना जाता है। यह धारा उन सभी मामलों को कवर करती है, जहां किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए कार्यों द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचने का खतरा होता है। इसका मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा कोई भी कार्य करता है जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को या किसी भी अन्य तरीके से शारीरिक या मानसिक नुकसान होता है। तो ऐसे व्यक्ति पर BNS Section 125 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जा सकती है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 12...

बीएनएस धारा 102 क्या है

  बीएनएस धारा 102 क्या है जिस व्यक्ति की मृत्यु का इरादा था उसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु कारित करके गैर इरादतन हत्या यदि कोई व्यक्ति, ऐसा कुछ भी करके, जिसका वह इरादा रखता है या जानता है कि मृत्यु कारित होने की संभावना है, किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु कारित करके गैर इरादतन हत्या करता है, जिसकी मृत्यु न तो वह चाहता है और न ही जानता है कि मौत कारित होने की संभावना है, तो गैर इरादतन हत्या की जाती है। अपराधी द्वारा इस प्रकार का वर्णन किया गया है कि यह तब होता जब उसने उस व्यक्ति की मृत्यु कारित की होती जिसकी मृत्यु वह चाहता था या स्वयं जानता था कि वह मृत्यु कारित कर सकता है।

भारतीय न्याय संहिता

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कौन-कौन से हैं नए कानून भारत के क्रिमिनल लॉ को शामिल किए जाने वाले तीन अहम दस्तावेजों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय रिवायतों का कम्युनिस्टों में साफ हो गया। अब इन त्रिस्तरीय बिलों की जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। इसके बाद संज्ञाहरण और बाद में रोमानिया में प्रवेश द्वार। यदि यह तीन वैज्ञानिक कानून की शक्तियां ले जाता है तो ये बिल भारतीय दंड संहिता (एपीसी), आपराधिक अभियोजक और भारतीय न्यायिक अधिनियम की संहिता की जगह ले लेगा। नये कानून की धाराओं में बदलाव? आईपीसी में धारा 511 लागू हैं. इसकी जगह भारतीय पौराणिक कथाओं में 356 धाराएं हैं। पुराने कानून से नये कानून में 175 धाराएं बदली गयीं। भारतीय ऐतिहासिक संहिता में 8 नई धाराएं, 22 धाराएं हटाई गई रचनाएं।  इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं रेह मोशन और 160 धाराएं बदली गति। नए कानून में 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं और 9 खत्म हो गई हैं। आपराधिक नए क़ानूनों में 6 बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव क्या हैं? 1. मॉब लिंचिंग और आपत्तिजनक अपराध के लिए सजा दी गई वर्तमान में जो कानून है उसमें मॉब लिंचिंग और सांप्रदायि...

मोटर विहिकल् एक्ट

 एमपी में मोटर व्हीकल एक्ट जुर्माने की बढ़ी हुई राशि लागू अब केंद्र के समान जुर्माना राशि एमपी में भी होगी लागू जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान अधिसूचना की पेश सबसे अधिक जुर्माना एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड सहित अन्य आपातकालीन वाहन के रास्ता रोकने पर देना होगा जुर्माना ये है नई जुर्माना राशि बिना हेलमेट 300 बिना सीट बेल्ट 500 बिना इंश्योरेंस 2000 बिना परमिट 10000 बिना लाइसेंस 1000 हॉर्न का शोरगुल एक से तीन हजार वायु प्रदूषण 10000 ओवर स्पीड एक से तीन हजार गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करना 3000 आपातकालीन वाहन का रास्ता रोकना 10000

IPC 1860 भारतीय दंड संहिता की प्रमुख धाराएं

  भारतीय दंड संहिता की प्रमुख धाराएं आईपीसी धारा 1 - संहिता का नाम और उसके प्रवर्तन का विस्तार आईपीसी धारा 2 - भारत के भीतर किए गए अपराधों का दण्ड आईपीसी धारा 3 - भारत से परे किए गए किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अफराधों का दण्ड आईपीसी धारा 4 - राज्यक्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार आईपीसी धारा 5 - कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना आईपीसी धारा 6 - संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना आईपीसी धारा 7 - एक बार स्पष्टीकॄत पद का भाव आईपीसी धारा 8 - लिंग आईपीसी धारा 9 - वचन आईपीसी धारा 10 - पुरुष। स्त्री आईपीसी धारा 11 - व्यक्ति आईपीसी धारा 12 - लोक आईपीसी धारा 13 - क्वीन की परिभाषा आईपीसी धारा 14 - सरकार का सेवक आईपीसी धारा 15 - ब्रिटिश इण्डिया की परिभाषा आईपीसी धारा 16 - गवर्नमेंट आफ इण्डिया की परिभाषा आईपीसी धारा 17 - सरकार आईपीसी धारा 18 - भारत आईपीसी धारा 19 - न्यायाधीश आईपीसी धारा 20 - न्यायालय आईपीसी धारा 21 - लोक सेवक आईपीसी धारा 22 - जंगम सम्पत्ति आईपीसी धारा 23 - सदोष अभिलाभ आईपीसी धारा 24 - बेईमानी से आईपीसी धारा 25 - कपटपूर...

ट्रेन में किस वक्त TTE किसी भी हाल में चेक नहीं कर सकता टिकट, जानें क्या है नियम

  ट्रेन में किस वक्त TTE किसी भी हाल में चेक नहीं कर सकता टिकट, जानें क्या है नियम ट्रेन में सफर करते वक्त बगैर मर्जी के कोई आपको डिस्टर्ब नहीं कर सकता. रात 10 बजे के बाद TTE भी आपको जगा कर टिकट चेक नहीं कर सकता. ये रेलवे बोर्ड का नियम है. आइए इसके बारे में विस्तार से बताते है         भारत में ज्यादातर लोग ट्रेन में सफर करते हैं. भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. ट्रेन में सफर करते वक्त हर कोई चाहता है कि उसकी यात्रा आरामदायक हो. लेकिन ट्रेन में होने वाले शोर, टिकट चेकिंग, सीट को लेकर यात्रियों की आवाजाही से अक्सर लोग परेशान होते हैं. क्या आप जानते हैं कि आपकी बगैर मर्जी के कोई आपको डिस्टर्ब नहीं कर सकता. रेलवे के नियमों  के मुताबिक रेलवे का टिकट एग्जामिनर (TTE) भी सोते वक्त आपकी टिकट चेक नहीं कर सकता. आइए आपको रेलवे के इन नियमों के बारे में बताते हैं. रात 10 बजे के बाद TTE नहीं कर सकता टिकट चेक आपकी यात्रा के दौरान ट्रैवल टिकट एग्जामिनर (TTE) आपसे टिकट लेने आता है. कई बार वो देर रात में आपको जागकर टिकट या आईडी दि...

दहेज निषेध अधिनियम 1961

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    दहेज़ निषेध अधिनियम https://youtu.be/gil5VmRUmZk दहेज़ निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2  जिसमें दहेज़ को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है:- “दहेज़” का अर्थ है प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर दी गयी कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सुरक्षा या उसे देने की सहमति”:- विवाह के एक पक्ष के द्वारा विवाह के दूसरे पक्ष को; या विवाह के किसी पक्ष के अभिभावकों द्वारा; या विवाह के किसी पक्ष के किसी व्यक्ति के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को; शादी के वक्त, या उससे पहले या उसके बाद कभी भी जो कि उपरोक्त पक्षों से संबंधित हो जिसमें मेहर की रकम सम्मिलित नहीं की जाती, अगर व्यक्ति पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) लागू होता हो। इस प्रकार दहेज़ से संबंधित तीन स्थितियां हैं- विवाह से पूर्व; विवाह के अवसर पर; विवाह के बाद; दहेज़ लेने और देने या दहेज लेने और देने के लिए उकसाने पर या तो 6 महीने का अधिकतम कारावास है या 5000 रूपये तक का जुर्माना अदा करना पड़ता है। वधु के माता-पिता या अभिभावकों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दहेज़ की मांग करने पर भी यही सजा दी जाती है। बाद में संशोधन अधिनियम के द्वारा इन सजाओं को भी ब...

सूचना का अधिकार 2005 शुल्क

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  आज की इस पोस्ट में आपको सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों से अवगत कराते है। यह जानकारी आम आदमी के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिससे व्यक्ति अपने अधिकार समझ सकता है। सूचना के अधिकार के लिये निर्धारित शुल्क 1. सूचना के अधिकार आवेदन ग्राह् किये जाने से पूर्व निर्धारित शुल्क लिया जाना आवश्यक है। 2. यदि लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार का आवेदन खारिज किया जाता है, तो आवेदन के साथ संलग्न शुल्क विधि अनुसार वापस किया जाना आवश्यक नही है। 3 एक आवेदन के साथ कितनी भी जानकारी चाही गई हो परन्तु शुल्क 10/- रूपये ही निर्धारित रहेगा। 4. सूचना के अधिकार आवेदन के लिये न्यायालय शुल्क के स्टाम्प मान्य नही है। 5. सूचना के अधिकार के लिये शुल्क नगद, बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। लेकिन वह डाक खर्च के लिये मान्य नही होगा, डाक खर्च का शुल्क आवेदक को अलग से प्रदाय करना होगा। 6. कंपनी अधिनियम के अंतर्गत अपीलार्थी निर्धारित शुल्क जमा कर पंजि का निरीक्षण करने हेतु स्वतंत्र है। 7. अपीलार्थी द्वारा अपील के प्रक्रम पर नई जानकारी चाही जाने पर उसके द्वारा न...

धारा 365 366 367 क्या है

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   भारतीय दण्ड संहिता की धारा 365 का अपराध आज आपको धारा 365 366 367 के बारे में बताएगे। कभी - कभी बहुत से माता-पिता की शिकायत आती हैं कि उनकी लड़की को, दामाद ने जबरदस्ती मायके से ले गया परन्तु दामाद उसकी पत्नी को, पत्नी के सुसराल न ले जाकर कही और छिपा कर रखे और लड़की को उनके माता-पिता से न मिलने दे तो क्या दामाद पर लड़की के माता-पिता धारा 365 के अंतर्गत मामला दर्ज कर सकते हैं? जानिए धारा 365 क्या है? अगर कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति  का बलपूर्वक अपहरण या व्यपहरण करके व्यक्ति को किसी गुप्त स्थान पर छिपा कर रखता है तब ऐसा करने वाला व्यक्ति धारा 365 के अंतर्गत दोषी होगा। अब आप समझ गए होगे धारा 365 क्या है।  भारतीय दण्ड संहिता  की धारा 365 के अंतर्गत दण्ड      इस धारा के अपराध किसी भी तरह से समझौता योग्य नहीं होते है।यह अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते हैं। धारा 365 के विचारण का अधिकार पहले प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को था बाद में सरकार ने इसमें संशोधन करके इसके विचारण का अधिकार सत्र न्यायाधीश को दे दिया गया है।  सजा- उपयुक्त अपराध के लिए 7 वर...

कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम क्यों खिलाते थे, रामायण पर क्यों नहीं है |

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  कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम क्यों खिलाते थे, रामायण पर क्यों नहीं है | भगवान श्रीराम ने जीवन में कभी झूठ का सहारा नहीं लिया। उनका जीवन एक आदर्श जीवन था जबकि भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध में विजय के लिए ' पूर्व से स्थापित आदर्श' का अनिवार्य पालन नहीं किया बल्कि विजय की प्राप्ति के लिए पूर्व निर्धारित आदर्शों का उल्लंघन किया। फिर क्या कारण है कि कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम खिलाते थे रामायण पर नहीं। भारत में गीता पर हाथ रखकर कसम खाने की परंपरा कब शुरू हुई         प्रख्यात पत्रकार श्री हेमंत सिंह की एक स्टडी के अनुसार भारत में मुगल शासकों ने धार्मिक किताबों पर हाथ रखकर शपथ लेने की प्रथा शुरू की थी। क्योंकि मुगल शासक अपने लाभ के लिए झूठ बोलते थे, छल-कपट करते थे, इसलिए भारत के नागरिकों के वचन पर विश्वास नहीं करते थे लेकिन वह इस बात पर विश्वास करते थे कि भारत के नागरिक अपने धर्म ग्रंथ पर हाथ रखकर यदि शपथ उठा ले तो फिर झूठ नहीं बोलते। शायद उन्हें भारत में सत्य वचन के लिए 'गंगाजल' परंपरा का ज्ञान था।  कोर्ट में धार्मिक पुस्तक पर हाथ रख कर शपथ लेने का...

हत्या के लिए किडनैपिंग का केस किस धारा में दर्ज होगा

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       हत्या के लिए किडनैपिंग का केस किस धारा के तहत दर्ज किया जाएगा किडनैपिंग कई प्रकार की होती है। किसी व्यक्ति को कुछ देर तक निष्क्रिय करने के लिए। फिरौती या फिर किसी अन्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए और हत्या करने के लिए। भारतीय दंड संहिता में धाराओं का निर्धारण अपराध के उद्देश्य पर निर्भर करता है। इसलिए किडनैपिंग की धाराओं का निर्धारण भी उसके उद्देश्य पर किया जाता है। आज हम आईपीसी से पूछते हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी की हत्या करने के उद्देश्य से उसे किडनैप कर लेता है तो उसके खिलाफ किस धारा के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही यदि वह अपरहण करने के बाद हत्या करने में सफल हो जाता है तो उसके खिलाफ अपहरण की धारा लगेगी या सिर्फ हत्या का केस दर्ज होगा। भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 364 के तहत अगर किसी व्यक्ति का अपहरण या व्यपहरण करने का उद्देश्य हत्या करना मात्र है तो वह व्यक्ति धारा 364 के अंतर्गत दोषी होगा। 2. अगर आरोपी हत्या कर देता है तो धारा 302 (हत्या) के अपराध के साथ 364 के अपराध का भी दोषी होगा धारा  के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:- इस धारा के ...

पॉल्यूशन सर्टिफिकेट क्या है

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   अगर आपके पास अपनी गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है और आपको यह चिंता है कि ऐसे में आपका इंश्योरेंस क्लेम रद्द हो जाएगा, तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवपलमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने इस बात को लेकर यह साफ किया है कि पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं होने पर मोटर इंश्योरेंस पॉलिस के तहत किसी भी क्लेम को रद्द नहीं किया जाएगा. इसलिए मोटर इंश्योरेंस धारकों के लिए चिंता करने की कोई बात नहीं है. इरडा के सर्रकुलर के बाद हुई थी दुविधा दरअसल, इरडा ने 20 अगस्त को जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के CEO/ CMD को एक चिट्ठी भेजकर कहा था कि वाहन के इंश्योरेंस के रिन्युअल के समय वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट को प्रस्तुत करने को सुनिश्चित करें. इसमें उसने अपने 6 जुलाई 2018 के सर्रकुलर का हवाला दिया जिसमें एम सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करने को कहा था. इसके बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि PUC सर्टिफिकेट मौजूद नहीं होने पर रिन्युअल के आवेदन को रद्द किया जा सकता है जिससे क्लेम रिक्वेस्ट भी रद्द हो सकती है. ...

SPEED गाड़ी की नहीं सड़क की FIX होती है, तेज चलाई तो चालान नहीं जेल वारंट बनता है, नियम पढ़ लीजिए

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लोग अपने वाहन की स्पीड इस बात पर फिक्स करते हैं कि सड़क कैसी है, उस पर यातायात कितना है और वाहन की अधिकतम स्पीड कितनी है लेकिन वह नहीं जानते कि इस तरह वह आईपीसी की धारा 279 का उल्लंघन कर रहे हैं। इस धारा का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस चालान नहीं बनाती बल्कि 6 माह की जेल की सजा दी जाती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आईपीसी की धारा 279 के अनुसार स्पीड आपके वाहन में कि नहीं होती बल्कि सड़क की निर्धारित होती है। नेशनल हाईवे और शहर की सड़क पर सामान्य स्पीड में वाहन नहीं चलाया जा सकता भले ही आपके वाहन में कितनी भी स्पीड से चलने की क्षमता हो। कुछ सड़कों के किनारे लिखा भी होता है 'अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा'। आईपीसी 1860 की धारा 279 की परिभाषा:- कोई व्यक्ति जानबूझकर या जल्दबाजी में निम्न कृत्य करेगा:- 1. कोई भी वाहन को सार्वजनिक सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग पर पर उतावलेपन या लापरवाही से तेज रफ्तार से कोई भी वाहन चलाएगा। 2. कोई भी वाहन से तात्पर्य है - बस, ट्रक, बाइक, ट्रेक्टर आदि सड़क पर चलने वाले वाहन। 3. तेजरफ्तार से चलने वाले वाहन से जन-जीवन को खतरा होने की संभ...