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सावधान! सिलेंडर फटने पर मिलता है 40 लाख का इंश्योरेंस,

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  भारत में कानून सिर्फ कोर्ट-कचहरी तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े कई ऐसे नियम हैं जो काफी दिलचस्प और हैरान करने वाले हैं। आपके ब्लॉग के लिए यहाँ कुछ बेहतरीन टॉपिक दिए गए हैं: ​⚖️ कानून की 5 दिलचस्प और जरूरी बातें ​1. होटल में फ्री पानी और वॉशरूम का अधिकार ​ 'इंडियन सीरीज एक्ट, 1867' के अनुसार, आप देश के किसी भी होटल (चाहे वह 5-स्टार ही क्यों न हो) में जाकर मुफ्त में पीने का पानी मांग सकते हैं और उनके वॉशरूम का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए होटल मालिक आपको रोक नहीं सकता। ​2. शाम के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी पर रोक ​ CRPC की धारा 46(4) के तहत किसी भी महिला को सूरज ढलने के बाद (शाम 6 बजे) और सूरज उगने से पहले (सुबह 6 बजे) गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अगर मामला बहुत गंभीर है, तो पुलिस को गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेनी होगी और साथ में महिला पुलिस अधिकारी का होना अनिवार्य है। ​3. गैस सिलेंडर फटने पर 40 लाख का बीमा ​बहुत कम लोग जानते हैं कि अगर खाना बनाते समय गैस सिलेंडर फट जाए, तो उपभोक्ता (Consumer) 40 लाख रुपये तक के व्यक्तिगत दु...

नामांतरण (Mutation) नियम क्या है

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नामांतरण (Mutation) का अर्थ है   भूमि के स्वामित्व या अधिकार में बदलाव होने पर राजस्व रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी, नक्शा) में दर्ज नाम को बदलना , जिसकी प्रक्रिया ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन, आवश्यक दस्तावेज़ (रजिस्ट्री, पहचान पत्र, खसरा-खतौनी), शुल्क भुगतान और तहसीलदार द्वारा सुनवाई के बाद आदेश जारी होने तक चलती है, जिसके बाद पटवारी इन अभिलेखों को अद्यतन करता है, जिससे स्वामित्व का कानूनी प्रमाण मिलता है और शासकीय योजनाओं का लाभ मिल पाता है; यह प्रक्रिया विवादित न होने पर 30 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।   नामांतरण के नियम आधार:  नामांतरण स्वीकृत स्वत्व (जैसे बिक्री, वसीयत, उत्तराधिकार) के आधार पर होता है, कब्जे के आधार पर नहीं। समय-सीमा:  अविवादित प्रकरणों में 30 दिनों (या अन्य निर्धारित अवधि) के भीतर निराकरण आवश्यक है। अभिलेख अद्यतन:  आदेश के बाद पटवारी 7 दिनों के भीतर खसरा, खतौनी और नक्शे में प्रविष्टि कर डिजिटल हस्ताक्षर से सत्यापित करता है। लोक सेवा गारंटी:  समय-सीमा में निराकरण न होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।   नामांतरण की प्रक्रिया आवे...

दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार | बंटवारे के नियम और कानूनी हक़। Property

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  दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार | बंटवारे के नियम और कानूनी हक़ दादा की संपत्ति में पोते पोती का अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति पैतृक है या स्व-अर्जित, और उनके माता-पिता जीवित हैं या नहीं। अगर संपत्ति पैतृक है, तो पोता पोती को जन्म से ही अपने पिता के हिस्से के बराबर अधिकार मिलता है, लेकिन यह अधिकार तभी बनता है जब उनके पिता का निधन हो चुका हो। वहीं, अगर संपत्ति दादा की खुद की खरीदी हुई (स्व-अर्जित) है, तो पोते पोतियों का उस पर कोई सीधा कानूनी हक नहीं होता। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दादा की प्रॉपर्टी में किसका कितना अधिकार है? पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है और अगर माता-पिता जीवित हैं तो क्या वे दादा की संपत्ति पर पोता पोती दावा कर सकते हैं या नहीं? दादा की संपत्ति के प्रकार और उसमे पोते पोती के अधिकार दादा की प्रॉपर्टी में पोते और पोती का अधिकार जन्म से हो होता है या पिता के माध्यम से मिलता है, यह पूरी तरह से संपत्ति प्रकार पर निर्भर करता है। यहाँ हम दादा की संपत्ति के दो मुख्य प्रकारों के बारे में बात करेंगे:  1. दादाजी की स्...

राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ

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राजस्व विभाग में प्रचलित प्रमुख शब्द और उनके अर्थ रकबा- क्षेत्रफल,  खसरा- भूमि क्रमांक,  पांचसाला- पिछले पांच' साल का खसरा चांदा- सीमा चिन्ह,  मुनारा- सर्वेक्षण चिन्ह,  उपकर - अबवाब (मुख्य कर का उपकर) मौसूली- वसूली प्राप्त करना,  नस्ती- खात्मा,  अलामत- छोटे-छोटे चिन्ह,  मसाहती ग्राम- जिसकी सीमा न हो मीजान- कुल,  सकूनत- निवास  वाजिब-उल-अर्ज- निजी जमीन में सार्वजनिक उपयोग दर्शाने वाला रिकार्ड गिरदावरी- खेतों व फसलों का निरीक्षण कर रिकार्ड करना,  तितम्मा मिलान- हल, बैल, कृषि यंत्र की गणना,  गोशवारा- महायोग,  रूढ़ अलामात- परंपरागत सीमा,  हलफनामा- शपथ पत्र,  बैनामा- विक्रय पत्र,  बयशुदा- खरीदी,  काबिज- कब्जा है,  दीगर- अन्य,  वारिसान- उत्तराधिकारी,  बख्शीश- उपहार या दान,  फौत - मौत,  रहन- गिरवी,  कैफियत- स्पष्टीकरण/विवरण  साकिन- निवासी मौजा बेचिराग - बिना आबादी का गांव फकुल रहन - गिरवी रखी भूमि को छुड़ा लेना तबादला - भूमि के बदले भूमि लेना बैय - जमीन बेच देना मुसन्ना - असल रिकॉर्...

गोदनामा (Adoption Deed) क्या है

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  गोदनामा (Adoption Deed) एक कानूनी दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि एक बच्चे को उसके प्राकृतिक माता-पिता से दत्तक माता-पिता (गोद लेने वाले) को कानूनी रूप से सौंप दिया गया है। ​भारत में गोदनामा बनाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम के तहत संचालित होती है। ​यहाँ इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया चरण-दर-चरण दी गई है: ​1. गोदनामा (Adoption Deed) कैसे बनता है? ​गोदनामा बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है: ​ दस्तावेज का मसौदा (Drafting): सबसे पहले एक वकील के माध्यम से 'दत्तक विलेख' (Adoption Deed) तैयार करवाया जाता है। इसमें गोद लेने वाले माता-पिता, जन्म देने वाले माता-पिता और बच्चे की पूरी जानकारी होती है। ​ स्टाम्प पेपर: इस मसौदे को आपके राज्य के नियमानुसार निर्धारित मूल्य के नॉन-जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है। ​ हस्ताक्षर और गवाह: इस पर दोनों पक्षों (गोद देने वाले और गोद लेने वाले) के हस्ताक्षर होते हैं। इसके साथ ही दो गवाहों के हस्ताक्षर भी अनिवार्य हैं। ​ उप-प...

शादी रद्द कब और कैसे होती है - तलाक और विवाह समाप्त करने में अंतर

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  शादी रद्द कब और कैसे होती है - तलाक और विवाह समाप्त करने में अंतर ​कई बार जब पति-पत्नी अपने रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा पाते तो वे अपने विवाह के बंधन को खत्म करने की सोचते हैं। लेकिन शादी के रिश्ते को खत्म करने के भी दो तरीके होते हैं, एक ऐसा जिसमें शादी को बिलकुल गलत मान लिया जाता है और दूसरा जिसमें विवाह के बंधन को कानून के हिसाब से खत्म किया जाता है। इसलिए हम सभी का यह समझना बहुत जरूरी है कि ये दोनों तरीके कौन से है और इनमें से कौन सा तरीका सही होता है। आज के इस लेख में हम आपको शादी रद्द (Marriage Annulment) करने और तलाक (Divorce) के विषय के बारे में जानकारी देंगे कि, शादी रद्द करना और तलाक क्या होता हैं? विवाह को समाप्त कब और कैसे किया जा सकता है? शादी रद्द (Marriage Annulment) करना क्या होता है? शादी रद्द करने का मतलब है कि शादी (Marriage) को ऐसा माना जाए जैसे वो कभी हुई ही नहीं। यानि शादी को पूरी तरह से खत्म कर देना। सरल भाषा में कहे तो, कोर्ट जब यह तय करता है कि आपकी शादी कानूनी रूप से सही नहीं है, तो कोर्ट उस शादी को खत्म यानी रद्द कर देता है। इसे शादी का "रद्द करना", ...

Court Marriage कैसे करे? कोर्ट मैरिज डाक्यूमेंट्स, खर्चा, फायदे और प्रक्रिया

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  Court Marriage कैसे करे? कोर्ट मैरिज डाक्यूमेंट्स, खर्चा, फायदे और प्रक्रिया  दोस्तों भारत में विभिन्न धर्मो के लोग रहते है और उनमे शादी करने की प्रक्रिया और रीती रिवाज भी उनके धर्मो के अनुसार ही होते है। आजकल कोर्ट मैरिज का चलन भी काफी तेज़ी से बढ़ा है और बहुत से लोग है जो कोर्ट के जरिए शादी तो करना चाहते है पर उनके पास कोर्ट मैरिज से संबधित जानकारी का अभाव होता है। आज के इस लेख द्वारा हम आपको इस विषय से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से देंगे कि कोर्ट मैरिज क्या है? और कोर्ट मैरिज कैसे करे - पूरी प्रक्रिया? इसमें किन दस्तावेजों की जरुरत पड़ती है व शादी करने का खर्च कितना होता है?  इसलिए अगर आप भी इन्हीं सब सवालों के जवाब व इंडिया में कोर्ट मैरिज करने की प्रक्रिया को बहुत ही आसान तरीके से समझना चाहते है तो हमारे इस लेख को बिल्कुल ध्यान से पूरा पढ़े। क्योंकि हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद आपको इस कानूनी प्रक्रिया की हर वो जानकारी हो जाएगी, जिसका जवाब आप अभी तक ढूंढ रहे है।  विषयसूची     भारत में कोर्ट मैरिज करने के लिए योग्यता     कोर्ट मैरिज क...

कोर्ट मैरिज बनाम आर्य समाज शादी? प्रक्रिया, अंतर, फायदे और नुकसान

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  कोर्ट मैरिज बनाम आर्य समाज शादी? प्रक्रिया, अंतर, फायदे और नुकसान ​जब कोई लड़का और लड़की एक दूसरे के प्यार में होते हैं और शादी करना चाहते हैं, तो उन्हें अक्सर ये समझना मुश्किल होता है कि जल्द से जल्द शादी कैसे और किस तरह करें। आजकल सिर्फ पारंपरिक शादी ही नहीं, बल्कि कोर्ट मैरिज और आर्य समाज मैरिज जैसे आसान और कानूनी तरीके भी लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं। कई बार लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि कौन सा तरीका उनके लिए बेहतर है, खासकर जब शादी जल्दी करनी हो या दोनों का धर्म या जाति अलग हो। ऐसे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में कोई परेशानी न हो। इस लेख में हम आपको शादी करने के दो आसान तरीकों के बारे में सरल और सटीक जानकारी देंगे, कि कोर्ट मैरिज और आर्य समाज मैरिज में अंतर? ये दोनों तरह की शादी कैसे होती है - इनके फायदे, नुकसान।  कोर्ट मैरिज क्या होती है? कोर्ट मैरिज वह कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसमें लड़का और लड़की सरकारी ऑफिस में जाकर कानूनी तौर पर शादी (Legally Marriage) करते हैं। इसमें कोई पूजा-पाठ, फेरे या निकाह जैसी धार्मिक रस्में (Religious Rituals) न...