नामांतरण (Mutation) नियम क्या है
नामांतरण (Mutation) का अर्थ है भूमि के स्वामित्व या अधिकार में बदलाव होने पर राजस्व रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी, नक्शा) में दर्ज नाम को बदलना, जिसकी प्रक्रिया ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन, आवश्यक दस्तावेज़ (रजिस्ट्री, पहचान पत्र, खसरा-खतौनी), शुल्क भुगतान और तहसीलदार द्वारा सुनवाई के बाद आदेश जारी होने तक चलती है, जिसके बाद पटवारी इन अभिलेखों को अद्यतन करता है, जिससे स्वामित्व का कानूनी प्रमाण मिलता है और शासकीय योजनाओं का लाभ मिल पाता है; यह प्रक्रिया विवादित न होने पर 30 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
नामांतरण के नियम
- आधार: नामांतरण स्वीकृत स्वत्व (जैसे बिक्री, वसीयत, उत्तराधिकार) के आधार पर होता है, कब्जे के आधार पर नहीं।
- समय-सीमा: अविवादित प्रकरणों में 30 दिनों (या अन्य निर्धारित अवधि) के भीतर निराकरण आवश्यक है।
- अभिलेख अद्यतन: आदेश के बाद पटवारी 7 दिनों के भीतर खसरा, खतौनी और नक्शे में प्रविष्टि कर डिजिटल हस्ताक्षर से सत्यापित करता है।
- लोक सेवा गारंटी: समय-सीमा में निराकरण न होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
नामांतरण की प्रक्रिया
- आवेदन: लोक सेवा केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल (जैसे MP e-District) के माध्यम से आवेदन करें।
- दस्तावेज़ जमा करें: रजिस्टर्ड विक्रय पत्र, खसरा, खतौनी, पहचान पत्र (आधार/पैन), बैंक पासबुक आदि की स्व-सत्यापित प्रतियां संलग्न करें।
- सुनवाई: तहसीलदार आपत्ति या दावे की सुनवाई कर उचित आदेश पारित करेंगे।
- पटवारी द्वारा प्रविष्टि: तहसीलदार के आदेश के बाद पटवारी खसरा, खतौनी और नक्शे में नाम दर्ज कर प्रमाणित करेगा।
- अभिलेख प्राप्त करें: सत्यापित किसान-किताब और अद्यतन खसरा-खतौनी प्राप्त करें।
आवश्यक दस्तावेज़
- रजिस्ट्री (विक्रय पत्र)
- आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड (पहचान प्रमाण)
- खसरा और खतौनी (भूमि के रिकॉर्ड)
- नक्शा (भूमि का मानचित्र)
- बैंक पासबुक (यदि ऋण से संबंधित हो)
- वसीयत/उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
यह प्रक्रिया भूमि के स्वामित्व को सुरक्षित करती है और भविष्य में किसी भी धोखाधड़ी से बचाती है, खासकर महिलाओं के लिए यह सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण कदम है।
टिप्पणियाँ
Aam log kafi pareshn hote hai iske karan. Thanks for information