बैंक लोन किस्त (EMI) न भरने पर क्या होता है Bank lone

 



लोन किस्त (EMI) न भरने पर क्या होता है: बैंक कार्रवाई और कानूनी अधिकार


आजकल घर, गाड़ी, मोबाइल या किसी ज़रूरी काम के लिए लोन लेना आम बात हो गई है। लोग आसान किस्तों में पैसा लौटाने की सोचकर लोन ले लेते हैं। जिसके बाद शुरू में तो सब ठीक चलता है, लेकिन जैसे ही कमाई काम होती है या खर्च बढ़ जाता है, तो हर महीने की किस्त भरना मुश्किल हो जाता है। कई लोग सोचते हैं कि “एक-दो महीने की देरी से कुछ नहीं होगा”, लेकिन ऐसे मामलों में बैंक या उधार देने वाली कंपनी आपकी गाड़ी व घर को जब्त करने से लेकर अन्य कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है। इसलिए इस विषय के बारे में सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। आज के इस लेख में हम सरल भाषा में आपको बताएंगे कि, लोन किस्ते (Loan EMI) न भरने पर क्या होता है? समय पर ईएमआई​ न भरने पर बैंक क्या लीगल एक्शन ले सकता है? बैंक की कार्रवाई से बचने और डिफॉल्ट हो जाने पर कानूनी अधिकार और विकल्प?

EMI क्या होती है - समय पर लोन ईएमआई भुगतान ना करने पर क्या होता है?

EMI का पूरा नाम है Equated Monthly Installment, जिसे हिंदी भाषा में समान मासिक किस्त कहा जाता है। इसका मतलब यह होता है कि जब कोई व्यक्ति अपना घर खरीदता है, कार लेता है, पढ़ाई के लिए लोन लेता है या किसी ज़रूरत के लिए बैंक से पैसे कर्ज (Loan) के तौर पर लेता है, तो वह पूरा पैसा एक साथ लौटाने की बजाय हर महीने थोड़ा-थोड़ा कर के चुकाता है। यह हर महीने पैसे देने की प्रक्रिया ही ईएमआई होती है।

लोन की किस्तें कैसे तय होती है?

जब कोई व्यक्ति बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन लेता है, तो सबसे ज़रूरी सवाल यही होता है कि हर महीने कितनी किस्तें देनी होगी। लोन की किस्तें कितनी होगी, यह मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करता है - लोन की रकम, ब्याज दर और लोन की अवधि। नीचे इन तीनों को बहुत ही आसान भाषा में समझाया गया है।
 

लोन की रकम (Loan Amount): लोन की किस्तें तय करने में सबसे पहली बात यह होती है कि आपने बैंक से कितना पैसा उधार लिया है। इसे लोन रकम (Loan Amount) कहा जाता है। जितनी ज्यादा रकम (Amount) का लोन लिया जाएगा, ईएमआई भी उतनी ही ज्यादा बनेगी। और अगर लोन की रकम कम है, तो किस्तें भी कम बनेगी।


ब्याज दर (Interest Rate): दूसरी जरूरी बात है, ब्याज दर। यानी बैंक या फाइनेंस कंपनी आपके लोन पर कितने प्रतिशत ब्याज (Interest) ले रही है। अगर ब्याज दर ज्यादा है, तो किस्तें भी ज्यादा देनी पड़ेगी। और अगर ब्याज दर कम है, तो किस्तें थोड़ी कम बनेगी।


लोन की अवधि (Loan Tenure): तीसरी बात है, कि लोन कितने समय के लिए लिया गया है। इस समय को ही लोन की अवधि या Loan Tenure कहा जाता है। अगर लोन का समय ज्यादा होगा, जैसे 5 या 10 साल, तो EMI हर महीने कम बनती है। लेकिन लंबी अवधि में कुल मिलाकर आपको ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। वहीं अगर लोन जल्दी चुकाने का मन है, तो किस्तें हर महीने ज्यादा देनी होती है, पर कुल ब्याज कम लगता है।


लोन और ईएमआई में "डिफॉल्ट" का क्या मतलब होता है?

जब कोई व्यक्ति बैंक से लोन लेता है, और अगर वो व्यक्ति समय पर अपनी किस्तें नहीं भरता या कई महीनों तक किस्त नहीं चुकाता, तो इस स्थिति को डिफॉल्ट (Default) कहा जाता है।

लोन कि किस्तें (EMI) न भरने पर क्या कार्यवाही हो सकती है?

अगर आप अपने लोन की किस्तें समय पर नहीं चुकाते, या कई महीनों तक किस्तों को नहीं भरते, तो इसका असर सिर्फ बैंक से नहीं, बल्कि आपकी पूरी आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। नीचे सरल भाषा में बताया गया है कि EMI न भरने पर क्या-क्या हो सकता है:-

1. क्रेडिट स्कोर (CIBIL) खराब हो जाता है

अगर आप EMI समय पर नहीं देते, तो आपका क्रेडिट स्कोर नीचे चला जाता है। यह स्कोर दिखाता है कि आपने पहले लोन कैसे चुकाया है। अगर स्कोर खराब हो गया तो आगे चलकर बैंक या किसी कंपनी से लोन मिलना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

2. बैंक जुर्माना (Penalty ) लगा सकता है

बैंक की तरफ से तय किए गए समय के बाद यानि देरी से किस्त जमा कराने पर बैंक आपसे जुर्माना (Fine) वसूलता है। यह जुर्माना हर दिन या हर महीने बढ़ता जाता है और आपका कर्ज और भी ज्यादा हो जाता है।

3. बैंक कानूनी कार्रवाई कर सकता है

अगर आपने बहुत ज्यादा समय से अपनी किस्तें नहीं भरी है, तो बैंक आपको कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेज सकता है। इसके अलावा यह मामला कोर्ट में भी जा सकता है।

4. बैंक आपकी संपत्ति जब्त कर सकता है

अगर आपने गाड़ी, मकान या कोई और चीज गिरवी रखकर लोन लिया है, और आप किस्तें नहीं भरते, तो बैंक वह चीज जब्त (Seized) कर सकता है। बैंक उसे बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है।

5. बैंक का एजेंट घर या ऑफिस तक आ सकता है

अगर कई दिनों तक किस्तें नहीं भरी जाती, तो बैंक का रिकवरी एजेंट आपके घर या दफ्तर तक आ सकता है।

Loan EMI न भरने पर बैंक से लीगल नोटिस कब आता है?

जब कोई व्यक्ति बैंक या किसी फाइनेंस कंपनी (NBFC) से लोन लेता है और समय पर EMI नहीं भरता, तो शुरुआत में बैंक याद दिलाता है। लेकिन अगर कई बार किस्तें मिस हो जाती है, तो मामला धीरे-धीरे कानूनी कार्रवाई तक पहुंच जाता है। आइए अब समझते हैं कि 

कितनी ईएमआई मिस होने पर लीगल नोटिस आता है?

अगर कोई व्यक्ति लगातार 2 या 3 महीनों तक EMI नहीं भरता, यानी लगभग 60 से 90 दिनों तक किस्तें नहीं चुकाता, तो बैंक या NBFC पहला लीगल नोटिस भेज सकता है। इस नोटिस में बताया जाता है कि आपने लोन की शर्तों का उल्लंघन (Violation) किया है और अगर आपने जल्दी भुगतान (Payment) नहीं किया, तो बैंक आगे सख्त कार्रवाई कर सकता है।

SARFAESI Act के तहत नोटिस कब भेजा जाता है?

अगर आपने लोन किसी संपत्ति (जैसे घर, दुकान, जमीन) को गिरवी (Mortgage) रखकर लिया है, और आपने लंबे समय तक ईएमआई नहीं भरी है, तो बैंक या NBFC आपके लोन को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर सकता है।
इस नोटिस में लिखा होता है कि अगर आपने 60 दिनों के अंदर बकाया पैसे नहीं चुकाए, तो बैंक आपकी संपत्ति को जब्त कर सकता है और उसे बेचकर लोन की रकम वसूल सकता है।

कौन से लोन में सबसे जल्दी कानूनी कार्रवाई होती है?

लोन कई तरह के होते है, इसलिए कौन-से लोन पर कितनी जल्दी और किस तरह की कानूनी कार्रवाई होती है, ये भी अलग-अलग प्रकार से ही तय होता है। आइये इस जानकारी को सरल भाषा में समझते है:

होम लोन (Home Loan): अगर आपने खुद का घर या किसी जमीन को खरीदने के लिए लोन लिया है और अब अगर आप उस लोन की किस्तें नहीं भर रहे हैं, तो बैंक SARFAESI Act के तहत 60 दिन के अंदर नोटिस भेज सकता है। अगर उसके बाद भी भुगतान (Payment) नहीं किया गया, तो प्रॉपर्टी जब्त की जा सकती है।


निजी लोन (Personal Loan): पर्सनल लोन बिना किसी जमानत के दिया जाता है, इसलिए अगर आप EMI नहीं चुकाते, तो बैंक आपको कोर्ट का नोटिस भेज सकता है। साथ ही, रिकवरी एजेंट भी घर या दफ्तर भेजे जा सकते हैं।


गाड़ी का लोन (Vehicle Loan): अगर आपने गाड़ी के लिए लोन लिया है और किस्तें नहीं भर रहे हैं, तो बैंक बिना कोर्ट की अनुमति (Permission) के सीधी गाड़ी जब्त कर सकता है।


क्रेडिट कार्ड लोन (Credit Card Loan): अगर आप लगातार क्रेडिट कार्ड के पैसे नहीं चुकाते, तो बैंक सिविल कोर्ट में केस दर्ज (Case Register) कर सकता है या फिर लोक अदालत (Lok Adalat) के जरिए वसूली की प्रक्रिया शुरू होती है।


क्या लोन कि किस्तें (EMI) ना भरने पर रिकवरी एजेंट घर आ सकता है?

हाँ, बैंक या कंपनी का रिकवरी एजेंट घर आ सकता है, लेकिन उसके लिए कुछ नियम होते हैं। उसे कभी भी धमकी नहीं देनी चाहिए, न ही गाली-गलौज करनी चाहिए। इसके अलावा वह आपसे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक ही बात कर सकता है, रात में नहीं।

अगर एजेंट बदतमीजी करता है, तो आप बैंक में शिकायत कर सकते हैं या कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं।

आप समय पर EMI Pay नहीं भर पा रहे हैं तो क्या करें - कानूनी अधिकार और विकल्प

अगर आप किसी वजह से किस्त समय पर नहीं भर पा रहे हैं, तो घबराने की बजाय समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है। नीचे कुछ ऐसी जरुरी बाते बताई गई है, जो आपकी काफी मदद कर सकती हैं:

1. बैंक से लोन की शर्तों में बदलाव की मांग करें

आप बैंक से कह सकते हैं कि किस्त की रकम कम की जाए या लोन का समय बढ़ा दिया जाए। इसे loan restructuring या rescheduling कहा जाता है। इससे हर महीने का बोझ थोड़ा हल्का हो जाता है।

2. बैंक से सुलह या समझौते की कोशिश करें

अगर आप पूरी रकम नहीं चुका सकते, तो कई बार बैंक कुछ छूट देकर मामला निपटा देता है।

3. लोक अदालत (Lok Adalat) का सहारा लें

अगर बैंक आप पर बहुत ज्यादा दबाव बना रहा है और कैसे भी बात नहीं बन पा रही है, तो आप Lok Adalat में जाकर मामला सुलझा सकते हैं। यहां दोनों पक्षों की बात को सुना जाता है और समझदारी से हल निकाला जाता है।

4. कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करें

अगर आपको लगता है कि बैंक या फाइनेंस कंपनी आपके साथ गलत व्यवहार कर रही है,
निष्कर्षअगर कभी ऐसा समय आए जब आप EMI नहीं चुका पा रहे हों, तो घबराएं नहीं और चुप बैठने की बजाय बैंक से खुलकर बात करें। बैंक या कंपनी आपकी बात सुनेगी और कुछ न कुछ रास्ता जरूर निकालेगी। समय रहते सही कदम उठाने से आप बड़े नुकसान, कानूनी कार्रवाई और मानसिक तनाव से बच सकते हैं।

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अगर मैं एक महीने की किस्त (EMI) नहीं भर पाऊं तो क्या होगा?

एक महीने की देरी पर बैंक केवल आपको याद दिलाने के लिए कॉल, मैसेज या ईमेल भेजता है। साथ ही थोड़ा जुर्माना और ब्याज भी जुड़ सकता है।

बैंक या NBFC लीगल एक्शन कब लेते हैं?

अगर आपने लगातार 90 दिन तक किस्त नहीं भरी, तो बैंक इसे "डिफॉल्ट" मानता है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है।

क्या रिकवरी एजेंट जब चाहे तब आ सकता है?

नहीं, RBI के नियमों के अनुसार रिकवरी एजेंट सिर्फ सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक ही आपसे संपर्क कर सकता है।

कितनी किस्त न भरने पर बैंक गाड़ी या प्रॉपर्टी जब्त कर सकता है?

अगर आप लगातार लगभग 3 महीने यानी 90 दिन तक EMI नहीं भरते, तो बैंक इस स्थिति को डिफॉल्ट मानता है। अगर लोन गाड़ी या घर को गिरवी रखकर लिया गया है, तो बैंक नोटिस देने के बाद उसे जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

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