गोदनामा (Adoption Deed) क्या है

 





गोदनामा
(Adoption Deed) एक कानूनी दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि एक बच्चे को उसके प्राकृतिक माता-पिता से दत्तक माता-पिता (गोद लेने वाले) को कानूनी रूप से सौंप दिया गया है।

​भारत में गोदनामा बनाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम के तहत संचालित होती है।

​यहाँ इसे बनाने की पूरी प्रक्रिया चरण-दर-चरण दी गई है:

​1. गोदनामा (Adoption Deed) कैसे बनता है?

​गोदनामा बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:

  • दस्तावेज का मसौदा (Drafting): सबसे पहले एक वकील के माध्यम से 'दत्तक विलेख' (Adoption Deed) तैयार करवाया जाता है। इसमें गोद लेने वाले माता-पिता, जन्म देने वाले माता-पिता और बच्चे की पूरी जानकारी होती है।
  • स्टाम्प पेपर: इस मसौदे को आपके राज्य के नियमानुसार निर्धारित मूल्य के नॉन-जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर प्रिंट किया जाता है।
  • हस्ताक्षर और गवाह: इस पर दोनों पक्षों (गोद देने वाले और गोद लेने वाले) के हस्ताक्षर होते हैं। इसके साथ ही दो गवाहों के हस्ताक्षर भी अनिवार्य हैं।
  • उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-Registrar Office): तैयार दस्तावेज को लेकर संबंधित तहसील या उप-पंजीयक कार्यालय जाना होता है। वहाँ फोटो और बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
  • पंजीकरण (Registration): जब रजिस्ट्रार इस पर हस्ताक्षर कर देता है, तो यह एक कानूनी दस्तावेज बन जाता है। इसे पंजीकृत गोदनामा कहा जाता है।

​2. आवश्यक शर्तें (Eligibility)

  • उम्र का अंतर: गोद लेने वाले माता-पिता और बच्चे की उम्र में कम से कम 21 वर्ष का अंतर होना चाहिए।
  • बच्चे की उम्र: हिंदू कानून (HAMA) के तहत बच्चा 15 वर्ष से कम आयु का होना चाहिए (जब तक कि कोई विशेष परंपरा न हो)।
  • सहमति: यदि गोद लेने वाले पति-पत्नी हैं, तो दोनों की आपसी सहमति अनिवार्य है।

​3. जरूरी दस्तावेज (Documents Needed)

  • ​गोद लेने वाले और देने वाले माता-पिता के आधार कार्ड/पैन कार्ड
  • ​बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र
  • ​दत्तक माता-पिता का शादी का प्रमाण पत्र
  • ​दो गवाहों के आईडी प्रूफ।
  • ​परिवार की फोटो और आय प्रमाण पत्र (कुछ मामलों में)।

​महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव (2026 के संदर्भ में)

​भारत में अब किसी संस्था (अनाथालय) से बच्चा गोद लेने के लिए CARA (Central Adoption Resource Authority) के पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। बिना CARA की प्रक्रिया के निजी तौर पर बनाया गया गोदनामा (संस्थागत बच्चों के मामले में) कानूनी रूप से अमान्य हो सकता है। रिश्तेदारों के बीच गोद लेने के लिए अभी भी तहसील के माध्यम से गोदनामा बनाया जा सकता है।

सुझाव: चूंकि यह एक संवेदनशील कानूनी मामला है, इसलिए हमेशा अपने क्षेत्र के किसी सिविल वकील या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सलाह जरूर लें।


​क्या आप गोदनामा का कोई सैंपल फॉर्मेट (Draft) देखना चाहेंगे जिसे आप अपने वकील को दिखा सकें?

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